
प्रशांत भूषण ने ये स्वीकार कर लिया है कि उनके पास और पूरे विपक्ष के पास कोई और चारा नहीं है।
12 साल से पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत बहुत आगे निकल चुका है...
• 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए
• जम्मू-कश्मीर आर्टिकल 370 से आज़ाद होकर प्रगति कर रहा है
• भारत 11वीं से 4वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया
• पूरा ग्लोबल साउथ एक सुर में भारत की ग्लोबल लीडरशिप को मान रहा है
• जनता विपक्ष को जो थोड़े-बहुत मौके देती थी, वो भी कम होते जा रहे हैं
तो बात तो सही है, और कोई ऑप्शन नहीं बचा है इनके पास। ये revolution/regime change के प्रयास करेंगे, जिसमें ये खुद बता रहे हैं कि खूब खून बहेगा!
किसका खून बहेगा? इनका? दूसरे नेताओं का? जुलाई के दिल्ली प्रोटेस्ट्स के दौरान सारे CJP के नेता भाग खड़े हुए थे। कोई बर्गर खा रहा था, कोई छिपकर कहीं फरार हो गया था... खून बहा था आपके और हमारे बच्चों का, युवाओं का, जो इनके बहकावे में आ गए थें।
मासूम बच्चों को बहकाकर ये लोग फिर से सड़क पर उतारने वाले हैं... बरगलाने की पूरी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आपको, हम सबको, साफ़-साफ़ नज़र आ रहा है। इनका प्रयास कभी एजुकेशन में सुधार करना, EVM चेक करना या वोट चोरी को साबित करना था ही नहीं।
इनका एक ही प्रयास है, दंगे करना। ये भारत को दंगे की आग में धकेलना चाहते हैं और खुद मान भी रहे हैं कि यही इनका प्रयास है।
कश्मीरी युवा, जिसे कांग्रेसी गुंडों ने बेरहमी से पीटा, वो बार-बार कहता रहा, मैं भारत को बांग्लादेश और नेपाल नहीं बनने दूंगा। आपको भी आगे आना पड़ेगा, देश को इन अराजकतावादियों और दंगाइयों से बचाना होगा। FCRA में बदलाव से पहले ये इनका आखिरी प्रयास है। इसके बाद इनकी फंडिंग रुक जाएगी। गैर-कानूनी कारनामे रुक जाएंगे।
ये देश-विरोधी, बाहरी ताकतों का इनके माध्यम से आखिरी दांव यही है। इस दांव में देश के साथ खड़े रहिए। पीएम मोदी के साथ खड़े रहिए।