पढ़ाते हुए
एकाएक आया विचार
और रुक गया।
सोचने लगा
पढ़ा रहा हूँ
या बता रहा हूँ ,
सिर्फ सौंप रहा हूँ
या सृजित करा रहा हूँ,
खाली पात्र मान
डाल रहा हूँ
या मूल्यवान समझ
तराश रहा हूँ ,
इधर सोचा
उधर बदल गया
तरीका।
- आलोक कुमार मिश्रा
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