Geet Jain@Treeoflife14051
#BanAnimalTesting
#StopAnimalCruelty
Animals are not for lab testing
Rajat Sharma @RajatSharmaLiveभारत सरकार जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के नियमों में बदलाव करने जा रही है, इसका ड्राफ्ट जारी किया गया है और 5 नवंबर तक जनता से राय मांगी गई है. इस ड्राफ्ट में कई बातें हैरान करने वाली हैं. अब तक हमारे देश में जानवरों पर कॉस्मैटिक टेस्टिंग बैन है, लेकिन नए नियमों के मुताबिक इसकी इजाजत मिल सकती है. अब तक जानवरों पर लैब ट्रायल्स के लिए कड़े नियम हैं, सरकार से परमीशन लेनी पड़ती है, लेकिन अब एक्सपेरिमेंट्स के लिए सिर्फ उन्हीं मामलों में सरकारी परमीशन की जरूरत होगी, जिनमें ट्रायल के दौरान एनीमल को असहनीय दर्द होता हो या जानवरों की जिंदगी खतरे में हो. पशुप्रेमियों ने इसका विरोध किया है. PETA India ने सरकार से ये प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर ये कानून लागू हुआ तो पशुओं पर क्रूरता बढ़ेगी, जंगली जानवर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे, नए नियमों में खामियों का फायदा बड़ी कंपनियां उठाएंगी. PETA India की इस मुहिम का समर्थन करते हुए मेनका गांधी ने कहा कि जब दुनिया के बड़े देश अपने यहां पशुओं की लैब टेस्टिंग पर बैन लगा चुके हैं, तब भारत में इस तरह की छूट देना कहां तक उचित है. एक बात तो साफ़ है कि animal testing के नियमों में बदलाव पशुओं पर क्रूरता को बढ़ावा देगा, बेज़ुबान जानवरों को experiments के लिए और ज़्यादा आसानी से उपलब्ध करा देगा. जब Ethics Panel को जानवरों पर किए जाने वाले experiments के approval की authority मिल जाएगी तो कोई रोकने वाला नहीं होगा. जानवरों को भी दर्द होता है, उन्हें भी डर लगता है. सिर्फ़ वो अपनी तकलीफ़ कह नहीं पाते. Procedures के लिए खरगोश, चूहे, बंदर और dogs को labs में जिस तरह छोटे पिंजरों में बंद करके रखा जाता है, उन्हें बार-बार सुइयां चुभोई जाती हैं, ये सरासर ज़ुल्म है. इन मासूमों से उनकी consent नहीं ली जा सकती इसलिए उन पर जुल्म होता है. होना तो ये चाहिए कि testing में पशुओं का इस्तेमाल कम से कम हो, जानवरों की पीड़ा कम हो, जहां तक संभव हो animal testing के स्थान पर non animal testing अपनाई जाए, लेकिन नए नियमों से इसका उल्टा होगा. एक डर ये भी है कि जिन देशों में animal testing मुश्किल है, महंगी है, वो भारत की labs को animal testing के लिए इस्तेमाल करेंगे. ये बहुत ही ख़तरनाक है. इसलिए हम सबको इन नए नियमों के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए. पांच नवंबर की जो deadline है, उससे पहले विरोध ज़ाहिर करने के लिए एक QR code है, इसे स्कैन करके आप सभी अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं.
0008



















