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हर्ष गुजराल

  1. GLOBAL NEWS ANALYSIS✓@G_News_Analysis
    @G_News_Analysis
    #JusticeForBapuji #CycloneArnab #SupremeCourt हम यह नहीं कह रहे कि कानून का पालन नहीं होना चाहिए। न्यायालय के आदेशों का सम्मान आवश्यक है। लेकिन कानून का पालन सुनिश्चित करने और एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे बुजुर्ग व्यक्ति के प्रति मानवीय संवेदनशीलता दिखाने में कोई विरोधाभास नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर आदेश का उल्लंघन किया है, तो कानून अपना काम करे। लेकिन यदि देरी बीमारी, चिकित्सा परिवहन या प्रशासनिक अनुमति से जुड़ी परिस्थितियों के कारण हुई, तो उन तथ्यों की निष्पक्ष जाँच भी होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन, जेल प्रशासन, एयरपोर्ट प्रशासन और सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। नेताओं और अभिनेताओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में भी मानवीय आधार पर राहत और चिकित्सा सुविधाओं पर विचार किया जाता है। फिर किसी अन्य व्यक्ति के मामले में भी उम्र, बीमारी और चिकित्सा संबंधी परिस्थितियों पर निष्पक्षता से विचार करने की माँग क्यों न की जाए? यह सवाल किसी व्यक्ति को कानून से ऊपर रखने का नहीं है। यह सवाल है कि क्या कानून के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी उचित स्थान दिया जा रहा हैB न्याय हो, कानून का सम्मान हो, लेकिन मानवता की अनदेखी न हो। मीडिया से भी अपील है कि खबर की पूरी पृष्ठभूमि सामने रखे। जनता को केवल यह न बताए कि क्या हुआ, बल्कि यह भी बताए कि किन परिस्थितियों में हुआ। 2/2 11 MLC लाल बिहारी यादव Mitchell Starc ध्रुव त्रिपाठी Netanyahu हर्ष गुजराल ABHIMANYU BIRLA FOREVER LOVE राजीव यादव NO ACCOUNTABILITY NO REVENUE अभिषेक शर्मा Bibi Genie 4 आकाश अग्रवाल Jeon दिनेश गोयल UP MLC श्रीचंद शर्मा Los Angeles वाराणसी शिक्षक Maharashtra आगरा शिक्षक Ballot मान सिंह यादव Hardik अमित शाह जी Gadi Eisenkot नवल किशोर यादव Mansa सहारनपुर खंड MacBook Pro सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र Kakinada चिकित्सा सुविधा Railways नरेंद्र मोदी जी North Chennai Denis Israel उत्तरी चेन्नई Andhra Pradesh Andhra Pradesh Venezuela American Jews Cyclone Arnab The Supreme Court Jodhapur Jail Sant Shri Asharamji Bapu Bail नरेंद्र मोदी जी PM Modi Prime Minister Narendra Modi Ji Justice For Bapuji Modiji UN Human Rights violations UNHRC International Court of Justice ICJ Indian Judiciary Indian Constitution of India Parliament Lok Sabha Elections Rajya Sabha Uttarakhand Election Uttar Pradesh Election Results Opinion Poll Exit poll Mann Ki Baat PM of India PMO India President of India Chief Election Commission of India Gyanesh Kumar Cockroach Janta Party Boycott BJP Anti Hindu BJP Indian Democracy लोकतंत्र बचाओ भारत बचाओ सेव India BIG BREAKING NEWS FAKE NEWS CHANNELS PAID MEDIA SHOCKING facts Indian Government of India Shameful BIG Shame shame on Modi
    GLOBAL NEWS ANALYSIS @G_News_Analysis
    #JusticeForBapuji #SupremeCourt #Asaram Bapu #AsharamBapu #Jodhpur Jail Authority #HumanRights सीने में दर्द, ICU में भर्ती, एयर एम्बुलेंस में देरी और अब FIR की बात! 85-90 वर्ष के #आसाराम बापू के मामले में मानवता कहाँ है? जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह जी से भी सवाल! एक तरफ लगभग 85-90 वर्ष की उम्र के आसाराम बापू को सीने में दर्द की शिकायत होती है और उन्हें उज्जैन में ICU में भर्ती कराया जाता है। दूसरी तरफ, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पैरोल बढ़ाने की गुहार सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है, लेकिन राहत नहीं मिलती और उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया जाता है। इसके बाद साधक उनकी सुरक्षित यात्रा के लिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था करते हैं, ताकि लंबी सड़क यात्रा से बचते हुए उन्हें जोधपुर पहुँचाया जा सके। लेकिन आरोप है कि एयर एम्बुलेंस को इंदौर एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करनी पड़ी और जोधपुर में उतरने की अनुमति मिलने में भी देरी हुई। इस कारण यात्रा में देरी हुई और निर्धारित समय तक सरेंडर नहीं हो सका। अब @1stIndiaNews की 27 अक्टूबर 2026 की खबर में हेडलाइन चलाई गई कि आसाराम बापू ने शाम 5 बजे तक सेंट्रल जेल में सरेंडर नहीं किया। खबर में जेल अधीक्षक के हवाले से FIR दर्ज कराने की तैयारी और गिरफ्तारी के प्रयासों की बात भी कही गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या मीडिया की जिम्मेदारी केवल सरेंडर में देरी को प्रमुखता देना है, या उस देरी के पीछे की परिस्थितियों को भी दर्शकों के सामने रखना है? First India News और मीडिया से कुछ सीधे सवाल! पहला सवाल: जब सीने में दर्द की शिकायत और ICU में भर्ती होने की बात सामने आई, तो क्या खबर में इस स्वास्थ्य संबंधी परिस्थिति को उतनी ही प्रमुखता दी गई जितनी सरेंडर में देरी को? दूसरा सवाल: जब साधकों ने एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की, तो क्या मीडिया ने यह पता लगाने की कोशिश की कि इंदौर एयरपोर्ट पर विमान को प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ी और जोधपुर में उतरने की अनुमति मिलने में कथित देरी का कारण क्या था? तीसरा सवाल: यदि यात्रा में देरी हुई, तो क्या FIR की तैयारी की खबर दिखाने से पहले देरी के कारणों और संबंधित प्रशासन की भूमिका की भी पड़ताल की गई? चौथा सवाल: क्या दर्शकों को यह बताना मीडिया की जिम्मेदारी नहीं है कि एक ओर न्यायालय द्वारा निर्धारित समय का मामला था, तो दूसरी ओर एक बुजुर्ग व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षित चिकित्सा परिवहन का प्रश्न भी था? कानूनी कार्रवाई की खबर दिखाना गलत नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण परिस्थितियों को नजरअंदाज करके अधूरी तस्वीर पेश करना पत्रकारिता के मानकों पर सवाल जरूर खड़े करता है। जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह जी से भी पूछे जाने चाहिए जवाबदेही के सवाल! इस पूरे घटनाक्रम में जोधपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक प्रमोद सिंह जी की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य गौर करने लायक है। सितंबर 2025 में जयपुर सेंट्रल जेल से दो कैदी फरार हो गए थे। उस समय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह को APO (Awaiting Posting Orders) पर रखा गया था। इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। यह घटना अपने आप में प्रमोद सिंह जी की व्यक्तिगत लापरवाही साबित नहीं करती, लेकिन जेल प्रशासन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना बिल्कुल उचित है। प्रमोद सिंह जी, यदि सरेंडर में देरी के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए, तो जेल प्रशासन की अपनी कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों की समीक्षा भी क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या प्रशासन यह स्पष्ट करेगा कि आसाराम बापू की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सुरक्षित परिवहन और जेल पहुँचने की व्यवस्था के लिए क्या समन्वय किया गया था? क्या एयर एम्बुलेंस की अनुमति और यात्रा में हुई कथित देरी की जाँच की गई? और यदि देरी के पीछे प्रशासनिक कारण थे, तो उनकी जिम्मेदारी कैसे तय होगी? जब एक बुजुर्ग व्यक्ति सीने में दर्द की शिकायत के बाद चिकित्सा देखभाल में रहा हो, तो उसके मामले में संवेदनशीलता और उचित समन्वय की अपेक्षा करना गलत कैसे हो सकता है? हम किसी अधिकारी के विरुद्ध बिना प्रमाण व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं। लेकिन जवाबदेही का सिद्धांत सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यदि एक व्यक्ति से न्यायालय के आदेश का पालन करने की अपेक्षा की जाती है, तो प्रशासन से भी अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्पक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करे। सवाल सीधा है: जवाबदेही केवल सरेंडर में देरी करने वाले व्यक्ति की होगी, या प्रशासन की भूमिका की भी निष्पक्ष जाँच होगी? कानून के साथ मानवता भी जरूरी है! 1/2.."लोकतंत्र बचाओ
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  2. GLOBAL NEWS ANALYSIS✓@G_News_Analysis
    #JusticeForBapuji #SupremeCourt #Asaram Bapu #AsharamBapu #Jodhpur Jail Authority #HumanRights सीने में दर्द, ICU में भर्ती, एयर एम्बुलेंस में देरी और अब FIR की बात! 85-90 वर्ष के #आसाराम बापू के मामले में मानवता कहाँ है? जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह जी से भी सवाल! एक तरफ लगभग 85-90 वर्ष की उम्र के आसाराम बापू को सीने में दर्द की शिकायत होती है और उन्हें उज्जैन में ICU में भर्ती कराया जाता है। दूसरी तरफ, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पैरोल बढ़ाने की गुहार सुप्रीम कोर्ट में लगाई जाती है, लेकिन राहत नहीं मिलती और उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया जाता है। इसके बाद साधक उनकी सुरक्षित यात्रा के लिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था करते हैं, ताकि लंबी सड़क यात्रा से बचते हुए उन्हें जोधपुर पहुँचाया जा सके। लेकिन आरोप है कि एयर एम्बुलेंस को इंदौर एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करनी पड़ी और जोधपुर में उतरने की अनुमति मिलने में भी देरी हुई। इस कारण यात्रा में देरी हुई और निर्धारित समय तक सरेंडर नहीं हो सका। अब @1stIndiaNews की 27 अक्टूबर 2026 की खबर में हेडलाइन चलाई गई कि आसाराम बापू ने शाम 5 बजे तक सेंट्रल जेल में सरेंडर नहीं किया। खबर में जेल अधीक्षक के हवाले से FIR दर्ज कराने की तैयारी और गिरफ्तारी के प्रयासों की बात भी कही गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या मीडिया की जिम्मेदारी केवल सरेंडर में देरी को प्रमुखता देना है, या उस देरी के पीछे की परिस्थितियों को भी दर्शकों के सामने रखना है? First India News और मीडिया से कुछ सीधे सवाल! पहला सवाल: जब सीने में दर्द की शिकायत और ICU में भर्ती होने की बात सामने आई, तो क्या खबर में इस स्वास्थ्य संबंधी परिस्थिति को उतनी ही प्रमुखता दी गई जितनी सरेंडर में देरी को? दूसरा सवाल: जब साधकों ने एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की, तो क्या मीडिया ने यह पता लगाने की कोशिश की कि इंदौर एयरपोर्ट पर विमान को प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ी और जोधपुर में उतरने की अनुमति मिलने में कथित देरी का कारण क्या था? तीसरा सवाल: यदि यात्रा में देरी हुई, तो क्या FIR की तैयारी की खबर दिखाने से पहले देरी के कारणों और संबंधित प्रशासन की भूमिका की भी पड़ताल की गई? चौथा सवाल: क्या दर्शकों को यह बताना मीडिया की जिम्मेदारी नहीं है कि एक ओर न्यायालय द्वारा निर्धारित समय का मामला था, तो दूसरी ओर एक बुजुर्ग व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षित चिकित्सा परिवहन का प्रश्न भी था? कानूनी कार्रवाई की खबर दिखाना गलत नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण परिस्थितियों को नजरअंदाज करके अधूरी तस्वीर पेश करना पत्रकारिता के मानकों पर सवाल जरूर खड़े करता है। जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह जी से भी पूछे जाने चाहिए जवाबदेही के सवाल! इस पूरे घटनाक्रम में जोधपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक प्रमोद सिंह जी की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य गौर करने लायक है। सितंबर 2025 में जयपुर सेंट्रल जेल से दो कैदी फरार हो गए थे। उस समय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह को APO (Awaiting Posting Orders) पर रखा गया था। इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। यह घटना अपने आप में प्रमोद सिंह जी की व्यक्तिगत लापरवाही साबित नहीं करती, लेकिन जेल प्रशासन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना बिल्कुल उचित है। प्रमोद सिंह जी, यदि सरेंडर में देरी के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए, तो जेल प्रशासन की अपनी कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों की समीक्षा भी क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या प्रशासन यह स्पष्ट करेगा कि आसाराम बापू की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सुरक्षित परिवहन और जेल पहुँचने की व्यवस्था के लिए क्या समन्वय किया गया था? क्या एयर एम्बुलेंस की अनुमति और यात्रा में हुई कथित देरी की जाँच की गई? और यदि देरी के पीछे प्रशासनिक कारण थे, तो उनकी जिम्मेदारी कैसे तय होगी? जब एक बुजुर्ग व्यक्ति सीने में दर्द की शिकायत के बाद चिकित्सा देखभाल में रहा हो, तो उसके मामले में संवेदनशीलता और उचित समन्वय की अपेक्षा करना गलत कैसे हो सकता है? हम किसी अधिकारी के विरुद्ध बिना प्रमाण व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं। लेकिन जवाबदेही का सिद्धांत सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यदि एक व्यक्ति से न्यायालय के आदेश का पालन करने की अपेक्षा की जाती है, तो प्रशासन से भी अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्पक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करे। सवाल सीधा है: जवाबदेही केवल सरेंडर में देरी करने वाले व्यक्ति की होगी, या प्रशासन की भूमिका की भी निष्पक्ष जाँच होगी? कानून के साथ मानवता भी जरूरी है! 1/2.."लोकतंत्र बचाओ
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  3. Kudsi Raza@KudsiRaza_21
    @KudsiRaza_21
    हर्ष गुजराल
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  4. Abhishek✓@0Abhi27shek0
    2 · Trending in India #CycloneArnab 3 · Trending in India लाल बिहारी यादव 4 · Australia · Trending Mitchell Starc 5 · Trending in India North Chennai 6 · Trending in India Genie 4 7 · Politics · Trending Netanyahu 8 · Politics · Trending Israel 9 · Only on X · Trending #Husharu2 10 · Trending in India #DunePartThree 11 · Trending in India #Ennore 12 · Indian TV · Trending ABHIMANYU BIRLA FOREVER LOVE 13 · Trending in India वाराणसी शिक्षक 14 · Politics · Trending हर्ष गुजराल 15 · Trending in India #MLCElectionResults Trending with #MLCElection2026 16 · Trending in India आकाश अग्रवाल 17 · Music · Trending NO ACCOUNTABILITY NO REVENUE 18 · Trending in India सिंह यादव 19 · Trending in India राजीव यादव 20 · Trending in India दिनेश गोयल 21 · Sports · Trending Hardik 22 · Politics · Trending UP MLC 23 · Politics · Trending Gadi Eisenkot 24 · Trending in India हरि सिंह ढिल्लों 25 · Trending in India ध्रुव त्रिपाठी 26 · Trending in India Los Angeles 27 · Trending in India श्रीचंद शर्मा 28 · Trending in India सहारनपुर खंड 29 · Trending in India आगरा शिक्षक 30 · Trending in India Denis
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  5. Awanish M Vidyarthi✓@awanishvidyarth
    एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में लखनऊ में योगी जी के सामने कॉमेडियन हर्ष गुजराल 👇 “मैंने लखनऊ में एक फल बेचने वाले से अपराध के बारे में पूछा, तो उसने कहा कि यहां अपराध शून्य है । जब मैंने पूछा कि उसे कैसे पता, तो उसने जवाब दिया सर मैं खुद एक अपराधी था अब केले बेचता हूं”
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  6. Gaurav Shukla@shuklaagaurav
    CM योगी के सामने कॉमेडियन हर्ष गुजराल! मैंने लखनऊ में एक फल बेचने वाले से अपराध के बारे में पूछा, तो उसने कहा कि यहां अपराध शून्य है । जब मैंने पूछा कि उसे कैसे पता, तो उसने जवाब दिया सर मैं खुद एक अपराधी था अब केले बेचता हूं 😀
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    00029
  7. Nation Buzz News@NationBuzz1
    लखनऊ में सीएम योगी के सामने कॉमेडियन हर्ष गुजराल का ऐसा मजेदार किस्सा कि खुद सीएम योगी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। 'टाइम्स ऑफ इंडिया यूथ आइकन्स समिट एंड अवॉर्ड्स' के मंच पर जब सीएम योगी ने प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन हर्ष गुजराल को 'क्रिएटर ऑफ द ईयर' पुरस्कार से सम्मानित किया।
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    00067
  8. Media Scan✓@mediascandelhi
    अपने निष्ठावानों की उपेक्षा और ‘नए जुड़ाव’ के लिए प्रेम की रणनीति है खतरनाक भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में यह धारणा गहरी जड़ें जमाए हुए प्रतीत होती है कि उसके विचारधारा से जुड़े लोगों की एक विशाल और निष्क्रिय फौज मौजूद है। यह मान लिया गया है कि ये लोग कहीं नहीं जाएंगे, इसलिए उनकी उपेक्षा का कोई राजनीतिक मूल्य नहीं। इसी सोच के चलते ऐसे अनेक लोग, जो लंबे समय तक लिखते-बोलते रहे, अब चुप हो चुके हैं। उन्हें लगता है कि उनकी बातों का कोई असर नहीं। नेतृत्व को यह स्पष्ट संदेश अब तक नहीं मिला है। इसके विपरीत, सरकारों और संस्थाओं के मंचों पर प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल जैसे लोगों को बुलाया जा रहा है। महमूद फारूकी की दास्तानगोई चल रही है। हिमांशु वाजपेयी को सम्मानित किया जा रहा है। न्यू पिंच के अभिनव पांडेय, जो संघ और उसके विचारों की आलोचना करने में कभी नहीं थकते, सरकारी सहायता प्राप्त कार्यक्रमों में सक्रिय दिखते हैं। यह सब ‘नए लोगों को जोड़ने’ की योजना का हिस्सा बताया जाता है। लेकिन इस योजना में यह चिंता कहीं नहीं दिखती कि जो लोग वर्षों से साथ खड़े हैं, वे धीरे-धीरे छूट रहे हैं। इसके पीछे एक गहरी कुंठा काम कर रही है-यह मान्यता कि ‘अपने’ लोग कम जानकार हैं या फिर वे कहीं और जाएंगे नहीं। यही सोच हावी होकर अपने ही लोगों के साथ भेदभाव पैदा कर रही है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनाव हैं। यदि हिमांशु वाजपेयी और हर्ष गुजराल जैसी हस्तियों की लोकप्रियता का लाभ लेने की कोशिश हो, तो यह रणनीति कितनी प्रभावी होगी, यह अलग प्रश्न है। लेकिन हर्ष गुजराल के साथ प्रमाणपत्र हाथ में लिए खड़े योगी आदित्यनाथ की तस्वीर कई लोगों को असहज करती है। यह दृश्य मंच की गरिमा और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से सवाल खड़े करता है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे कलाकार और साहित्यकार हैं जो लगातार राष्ट्रीय विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं और शासन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं। उनके साथ यदि शीर्ष नेतृत्व खड़ा होता है, तो ‘नए लोगों’ के जुड़ने में बाधा क्यों मानी जाती है? योजना यह है कि नए लोग जुड़ें, लेकिन इसमें अपने साथियों के छूटने की कीमत चुकानी पड़ रही है। चाटुकार सलाहकारों की बातों में फंसकर बड़े नेता यदि सावधान नहीं होते, तो यह अंतर और गहरा होगा। बाबा सत्यनारायण मौर्या ने इसी मुद्दे को और स्पष्ट शब्दों में रखा है। उन्होंने पूछा है कि भाजपा की सरकारों ने आज तक किसी राष्ट्रवादी कवि या अच्छे स्थानीय कलाकार को सरकारी आयोजन में उचित भुगतान के साथ बुलाया हो तो बताएं। उन्हें लगता है कि प्राथमिकता बॉलीवुड के उन लोगों को दी जा रही है जो अभी कुछ समय पहले तक आलोचना करते रहे। अधिकारी को कमीशन मिलता है, नेताओं को बड़े नामों के साथ फोटो और तालियां मिल जाती हैं, लेकिन राष्ट्रवाद का ढोल पीटने वाले निष्ठावान लोग धृतराष्ट्र की तरह बैठे रह जाते हैं। सत्ता में न होने पर राष्ट्रवाद और देशभक्ति याद आती है, सत्ता में आने के बाद नहीं। गलती केवल उन लोगों की नहीं है जो आलोचना करते रहे। गलती उन धृतराष्ट्रों और गांधारियों की भी है जो स्वार्थ की पट्टी बांधकर आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि कोई कलाकार बीमारी या आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो तो उसकी सहायता करनी चाहिए। यह उचित है। लेकिन मंच की गरिमा से खिलवाड़ उचित नहीं। जिन्होंने कला को केवल व्यापार बनाया है, उनसे व्यावसायिक मापदंडों पर खरा उतरने की अपेक्षा करना अपमान नहीं, बल्कि व्यापारिकता है। फिर भी, नेताओं और अधिकारियों में कला की समझ कितनी है, यह सवाल बना रहता है। सामान्य कलाकार पूरी ताकत लगाकर काम करते हैं, उन्हें हजार रुपये भी नहीं मिलते। वहीं बड़े मंचीय नामों को कमीशन की सेटिंग से करोड़ों दिए जाते हैं। बिहार में कला-संस्कृति मंत्रालय मानो इप्टा के हवाले कर दिया गया है। वहां लगातार उन्हीं लोगों के कार्यक्रम हो रहे हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी लगभग यही स्थिति है। नए लोग जुड़ रहे हैं या नहीं, यह दावा किया जा सकता है, लेकिन अपने लोगों के मन में उपेक्षा का भाव गहरा रहा है। राजनीतिक दलों को विस्तार की जरूरत होती है। नए लोगों को जोड़ना गलत नहीं। लेकिन जब यह काम अपने निष्ठावानों की कीमत पर होने लगे, तब यह रणनीति आत्मघाती बन जाती है। चुनाव के समय लोकप्रिय चेहरों की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन वैचारिक आधार पर खड़े लोगों को लगातार नजरअंदाज करना दीर्घकाल में नुकसानदायक है। नेतृत्व को यह समझना होगा कि फौज तभी कारगर रहती है जब उसके लोगों को सम्मान और स्थान मिले। अन्यथा चुप्पी बढ़ेगी और कुंठा गहराएगी। यह केवल कला-संस्कृति का सवाल नहीं, संगठन की विश्वसनीयता का भी सवाल है। सावधानी इसी समय जरूरी है।
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    00025
  9. TV9 Bharatvarsh✓@TV9Bharatvarsh
    लखनऊ में कॉमेडियन हर्ष गुजराल ने यूपी में अपराध को लेकर एक मजेदार किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि रात में एक केले वाले से जब उन्होंने पूछा कि यूपी में क्राइम कम हुआ है या नहीं, तो उसने जवाब दिया कि अपराध बिल्कुल खत्म है, क्योंकि वह खुद पहले क्रिमिनल था और अब केले बेच रहा है. हर्ष का यह किस्सा सुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. #HarshGujral #YogiAdityanath #Lucknow #UPNews #UPCrime #TV9Reel
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  10. VIDIT GAUR✓@VIDITGAUR11
    योगी जी महाराज का जलवा तो है हर्ष गुजराल की एक बात और सहमत हु थोड़ा बढ़ा और घटा के बोलता हु 5,10,15,20,25,50,75 सब जेनेरेशन फैन है योगी जी की🙏
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    00198
  11. Vistaar News✓@VistaarNews
    कॉमेडियन हर्ष गुजराल ने सीएम योगी के सामने सुनाया किस्सा, ठहाका लगाकर हंसने लगे मुख्यमंत्री #UttarPradesh #YogiAdityanath #HarshGujral #UPCrime
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    002237
  12. ABP News✓@ABPNews
    'UP में अपराधी केले बेच रहे', कॉमेडियन हर्ष गुजराल के जोक पर CM योगी ने लगाए ठहाके #UP #YogiAdityanath #HarshGujral #ABPNews
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  13. Abhijit Dipke@khwabbb
    Are suno @grok ye "हर्ष गुजराल" kaun hai, और इसकी योगी जी के साथ फोटो वीडियो वायरल हो रही है क्या है पूरा मामला कहां का रहने वाला है यह
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  14. Rakesh Nagwadiya✓@RakeshNagwadiya
    नया सोशल मीडिया एक्ट होना चाहिए। जिसमें सरकार पहले कोर्ट से आदेश लाये कोई कानून का उल्लंघन हुआ है। अगर कानून टूटा है तो ही कंटेंट और Id हटाया जाए #IAS_Abhay #AbhishekSharma #Husharu2 लाल बिहारी यादव हर्ष गुजराल #DareDevil #ESTIC2026 राजीव यादव #IsraelElection #GodNightTuesday
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  15. Breaking News✓@News437471921
    UP. लखनऊ- CM योगी आदित्यनाथ महाराज जी के सामने कॉमेडियन हर्ष गुजराल का ऐसा मजेदार किस्सा कि खुद मुख्यमंत्री योगी जी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए ​आज लखनऊ में आयोजित 'टाइम्स ऑफ इंडिया यूथ आइकन्स समिट एंड अवॉर्ड्स' के मंच पर जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन हर्ष गुजराल को 'क्रिएटर ऑफ द ईयर' पुरस्कार से सम्मानित किया, हर्ष ने नए उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर एक जबरदस्त सच्चा किस्सा सुनाया:- "मैं पिछली बार लखनऊ में शो करने आया था और टहलते हुए मैंने एक केले बेचने वाले से पूछा- 'भाई, यूपी में अपराध का क्या हाल है?' उसने कहा- 'भैया, अपराध बिल्कुल खत्म है! 'जब मैंने पूछा कि आपको कैसे पता? तो उसने जवाब दिया- 'भैया, मैं खुद अपराधी था, अब केले बेच रहा हूँ।'" ​साथ ही हर्ष ने बिल्कुल सच कहा कि आज विदेशों में भी उत्तर प्रदेश का डंका बजता है, जिसके दो ही कारण हैं- "एक यूपी के लोग, और दूसरे यूपी के योग (योगी जी)!" और जब 30 साल का युवा और 70 साल के बुजुर्ग दोनों किसी नेता के प्रशंसक हो जाएं, तो समझिए कि प्रदेश में वाकई कुछ बहुत बेहतरीन काम हुआ है। @bstvlive ​@myogiadityanath @myogioffice @CMOfficeUP @HarshGujral @realharshgujral @AHindinews @KapilSharmaK9 @Zakirism @be_a_bassi @gaurav_comic @timesofindia @uppolice ​#YogiAdityanath #HarshGujral #UttarPradesh #Lucknow #UPMeinBaba #TOIYouthIcons #StandUpComedy #KapilSharma #ZakirKhan #AnubhavSinghBassi #NewUP #LawAndOrder #ViralVideo #UPRocks #योगी_आदित्यनाथ #हर्ष_गुजराल #उत्तर_प्रदेश #लखनऊ
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  16. Sanjay yadav@yadav_Sanjay01
    फिर ये अपराध करने वाले कौन हैं शुक्ला जी?? केले वाले के पापा? या हर्ष गुजराल के? यूपी इन अपराधों में आकाश क्यों छू लेना चाहता है? @Shubhamshuklamp
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    Shubham Shukla @Shubhamshuklamp
    हर्ष गुजराल:- भाई क्या सीन है यहाँ क्राइम का केले वाला:- भैया बिल्कुल खत्म है हर्ष गुजराल:- भाई आपको कैसे पता? केले वाला:- मैं ख़ुद क्रिमिनल था, अब केले बेच रहा हूं UP में क्राइम में कमी ही मायावती जी और अब इस सरकार की बड़ी उपलब्धि है।
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  17. Shubham Shukla✓@Shubhamshuklamp
    हर्ष गुजराल:- भाई क्या सीन है यहाँ क्राइम का केले वाला:- भैया बिल्कुल खत्म है हर्ष गुजराल:- भाई आपको कैसे पता? केले वाला:- मैं ख़ुद क्रिमिनल था, अब केले बेच रहा हूं UP में क्राइम में कमी ही मायावती जी और अब इस सरकार की बड़ी उपलब्धि है।
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  18. Aditya Verma 'Adi'@AdityaVermaAd12
    हर्ष गुजराल की बातों ने महफ़िल लूट ली 😂🔥 महाराज जी के सामने भी कॉमेडी का अलग ही अंदाज़! 😎🙏
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    043281
  19. Manoj Manu✓@ManojManuIN
    क्या हुआ जब कॉमेडियन हर्ष गुजराल और मुख्यमंत्री योगी हुए आमने सामने। #YogiAdityanath #CMYogi #HarshGujral
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  20. Samar Raj✓@SamarRaj_
    योगीराज का ही वीडियो है : वही कॉमेडियन हर्ष गुजराल मंच से कानपुर को क्राइम सिटी बता रहा है। हर किसी को हिंसक बता रहा है। वही जो आज योगी के साथ मंच पर खड़े होकर कह रहा था यूपी से अपराध एकदम खत्म हो गया है। सब नमूने हैं दलाल भी, मौका देखकर मुंह खोलते हैं।
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